Tuesday, November 19, 2013

नाचे धरा.........

नाचे धरा झूमे गगन
मन रोम -रोम खिल जाए
पेड़ो पर पंछी कुकुहाए
और समीर सरगम हो जाए

कदम -कदम हो दीप ख़ुशी के
राहो  पर सूरज खिल जाऍ
रजनी आए स्वप्निल-स्वप्निल
रजत चांदनी नभ पर छाए

नेह मिले इतना जीवन में
ह्रदय तुम्हारा भर -भर जाए
तेरे ऊर की  अभिलाषाए
सभी पूर्ण हो जाए

मेरी प्यारी बिटिया रानी
तुमको है आशीष यही
जीवन सुन्दर सफ़र लगे
हर प्रभात सुख लाए

                                 अशोक जौहरी  

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