नाचे धरा.........
नाचे धरा झूमे गगन
मन रोम -रोम खिल जाए
पेड़ो पर पंछी कुकुहाए
और समीर सरगम हो जाए
कदम -कदम हो दीप ख़ुशी के
राहो पर सूरज खिल जाऍ
रजनी आए स्वप्निल-स्वप्निल
रजत चांदनी नभ पर छाए
नेह मिले इतना जीवन में
ह्रदय तुम्हारा भर -भर जाए
तेरे ऊर की अभिलाषाए
सभी पूर्ण हो जाए
मेरी प्यारी बिटिया रानी
तुमको है आशीष यही
जीवन सुन्दर सफ़र लगे
हर प्रभात सुख लाए
अशोक जौहरी
नाचे धरा झूमे गगन
मन रोम -रोम खिल जाए
पेड़ो पर पंछी कुकुहाए
और समीर सरगम हो जाए
कदम -कदम हो दीप ख़ुशी के
राहो पर सूरज खिल जाऍ
रजनी आए स्वप्निल-स्वप्निल
रजत चांदनी नभ पर छाए
नेह मिले इतना जीवन में
ह्रदय तुम्हारा भर -भर जाए
तेरे ऊर की अभिलाषाए
सभी पूर्ण हो जाए
मेरी प्यारी बिटिया रानी
तुमको है आशीष यही
जीवन सुन्दर सफ़र लगे
हर प्रभात सुख लाए
अशोक जौहरी
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