पोछो इन आँखों को ......
पोछो इन आँखों को
रोको ये अश्रु कण
प्यार भरी बाहों में
दर्द क्यों पिघलता है
तप्त मौन ओठों से
पीते तुम अश्रु कण
आह भरी सांसो से
ह्रदय गीत रचता है
कुछ तो बतलाओ तुम
अश्रु क्यों बरसता है
मौन अधर रखने से
दिल मेरा कसकता है
अब तो जिद छोड़ो तुम
पड़ि गाँठ खोलो तुम
गाँठ पड़ी रहने से
प्यार पतित होता है
जीवन तो चलना है
गिर कर संभलना है
चल कर फिर गिरना है
पर फिर भी चलना है
भूलो बिसराओ अब
सपनो के गाँव में
बीत गई शाम जो
उसका क्या करना है
वक़्त की कगार पर
टूट गई नाव जो
मांझी के रोने से
उसका क्या होना है
अशोक जौहरी
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