दुश्मनी
यू तो न थी कोई दुश्मनी मेरी
किसी अपने ने निभा डाली है
तो मेरा सबाल है बस उससे यही
क्या खता हो गई क्यू घुला ये ज़हर
दुश्मनो से दोस्ती जिसकी निभे
कैसे उससे दोस्ती अपनी निभे
प्यार तेरा हो गया अब बेअसर
या कदम मेरे उठे उलटी डगर
चार दिन की ज़िंदगी प्यार से कटती मगर
प्यार के दुश्मन यहाँ बैठे हुए है हर डगर
अशोक जौहरी
यू तो न थी कोई दुश्मनी मेरी
किसी अपने ने निभा डाली है
तो मेरा सबाल है बस उससे यही
क्या खता हो गई क्यू घुला ये ज़हर
दुश्मनो से दोस्ती जिसकी निभे
कैसे उससे दोस्ती अपनी निभे
प्यार तेरा हो गया अब बेअसर
या कदम मेरे उठे उलटी डगर
चार दिन की ज़िंदगी प्यार से कटती मगर
प्यार के दुश्मन यहाँ बैठे हुए है हर डगर
अशोक जौहरी
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