भ्रष्ट तंत्र मंत्र है
भ्रस्ट तंत्र मंत्र है
जेब भरो यन्त्र है
देश यह स्वतंत्र है
जनता परतंत्र है
हर तरह से पस्त है
हर योजना ध्वस्त है
फिर भी नेता मस्त है
नई योजनाओ कि फेहरिस्त है
पहले सबने कमीशन खाए
फिर सब पर कमीशन बिठाए
यह घोटाला तंत्र है
यह सरकारी गणतंत्र है
जब जेबे सबकी भर गई
तो चुनाव कि राह प्रशस्त है
किसको मिलती है कुर्सी
और किसकी शिकस्त है
फुटपाथ पर पड़ा
ठंड से ठिठुरता
भूँखा अधमरा आदमी
क्या जाने ----
यही लोकतंत्र है
यही गण तंत्र है
अशोक जौहरी
भ्रस्ट तंत्र मंत्र है
जेब भरो यन्त्र है
देश यह स्वतंत्र है
जनता परतंत्र है
हर तरह से पस्त है
हर योजना ध्वस्त है
फिर भी नेता मस्त है
नई योजनाओ कि फेहरिस्त है
पहले सबने कमीशन खाए
फिर सब पर कमीशन बिठाए
यह घोटाला तंत्र है
यह सरकारी गणतंत्र है
जब जेबे सबकी भर गई
तो चुनाव कि राह प्रशस्त है
किसको मिलती है कुर्सी
और किसकी शिकस्त है
फुटपाथ पर पड़ा
ठंड से ठिठुरता
भूँखा अधमरा आदमी
क्या जाने ----
यही लोकतंत्र है
यही गण तंत्र है
अशोक जौहरी
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