Tuesday, November 19, 2013

गुरु माँ 

गुरु माँ  गुरु माँ गुरु माँ 
तू ही गंगा तू ही जमना 
तू ही तो संगम है 
तू ही पूजा तू ही अर्चना 
तू ही अक्छत  चन्दन 
तू प्रकाश की अखंड ज्योति है 
तू ही ज्ञान की   गंगा  
अब न शेष अज्ञानी हो गा 
ज्ञान कि ऐसी अलख जलाई 
लाखो पाओं चल  पड़े  उस पर 
राह जो तूने दिखाई 
गुरु माँ गुरु माँ। …। 

                      अशोक जौहरी 

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