तेरी इक हंसी -----
तेरी इक हंसी की खातिर
मैं हज़ार अश्क़ पी लूंगा
गमों की शाम जो आई
तो हंस के जी लूंगा
लवों पे उफ़ भी आई
तो लव को सी लूंगा
तेरे लव जो मुस्कराए
तो मैं ज़हर भी पी लूंगा
अशोक जौहरी
तेरी इक हंसी की खातिर
मैं हज़ार अश्क़ पी लूंगा
गमों की शाम जो आई
तो हंस के जी लूंगा
लवों पे उफ़ भी आई
तो लव को सी लूंगा
तेरे लव जो मुस्कराए
तो मैं ज़हर भी पी लूंगा
अशोक जौहरी
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