Sunday, November 17, 2013

उदास पांव 

शाम आती है 
उदास पांव से 
रोशनी पर सियाही पोत जाती है 
रात के साए 
काले ,सुरमई और फिर रुपहले 
हो जाते है 
चाँद तारे सभी दिल को लुभाते है 
पर आज फिर 
रोज कि तरह 
मेरे ख्वाब 
क्वाँरे के क्वाँरे 
रह जाते है 
कल सबेरा फिर आएगा 
रौशनी ताज़गी 
और उम्मीद के साथ 
दिन बीतते न बीतते 
वह फिर से  छल जाएगा 
कल फिर आएगा 
उदास पांव से 

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