उदास पांव
शाम आती है
उदास पांव से
रोशनी पर सियाही पोत जाती है
रात के साए
काले ,सुरमई और फिर रुपहले
हो जाते है
चाँद तारे सभी दिल को लुभाते है
पर आज फिर
रोज कि तरह
मेरे ख्वाब
क्वाँरे के क्वाँरे
रह जाते है
कल सबेरा फिर आएगा
रौशनी ताज़गी
और उम्मीद के साथ
दिन बीतते न बीतते
वह फिर से छल जाएगा
कल फिर आएगा
उदास पांव से
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