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jauhar
Tuesday, December 24, 2013
सबेरे सबेरे
तुम सबेरे सबेरे
मेरे सामने ऐसे थी
जैसे
मेरी सारी खुशियाँ
सिमट कर
तुम्हारी आँखों में
मुस्करा रही हों
अशोक जौहरी
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