Thursday, December 26, 2013

तलाश

मैं  हर वक़्त हर जगह 
तलाश करता हूँ 
एक दोस्त 
एक साथी 
एक यार 
एक हमराज़ 
मिलते है कई एक 
किन्तु पल दो पल को ही 
कुछ कदम साथ चल कर 
कुछ एक मोड़ मुड़ कर 
छोड़ देते है साथ 
कहते है 
वक़्त बदलता है 
राहें  बदलती है 
यार भी बदलने दो 
प्यार को न बंधने दो 
उसे हर आँख का कमल 
हर ओंठ कि कली 
हर दिल का गुलाब बनने  दो 
मेरे दिल के गुलदस्ते में 
यादो के कई फूल 
अध् मुस्काए मुरझाए पड़े है 
और मै  इन्हे 
जब तब 
अपने आँखों के 
गमगीन पानी से 
सींचता हूँ 
ज़िंदगी जीने के बहाने ढूँढता हूँ 
ज़िंदगी ढोने के सहारे ढूढ़ता हूँ 

                                 अशोक जौहरी 

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