प्राण में मेरे
प्राण में मेरे पला क्यों प्रिये प्यार तेरा
नयन में मेरे बसा क्यों प्रिये साज तेरा
क्यों ह्रदय मेरा बना तेरा बसेरा
क्यों मेरा गम बन गया तेरा अँधेरा
आज मेरी साँस तेरी सांस में क्यों पल रही
और मेरी भोर तेरी लालिमा क्यों बन रही
क्यों तुम्हारी हर अदा मेरे लिए एक जाम है
क्यों तुम्हारा मुस्कराना मेरी दिली प्यास है
क्यों निशा का हर पहर बीता तुम्हारी याद में
क्यों विरह का एक छण बदला कई साल में
अशोक जौहरी
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