Wednesday, December 25, 2013

मौसम बहुत प्यारा है

आज शाम से मौसम बहुत प्यारा है 
कुछ -कुछ तो ठंडक है 
कुछ -कुछ बदराया है 
बूंदो कि रिमझिम से
 नम  रेशमी हवा 
रह -रह कर मुझे लपेट लेती है 
और मैं 
तुम्हारे होने के अहसास को ढूँढता 
तुम्हारी महक को खोजता 
इधर से उधर 
उधर से इधर 
बरामदे में टहल रहा हूँ 
और तुम मिलती नहीं 
कही भी दिखती नहीं 
यह सूना -सूना बरामदा 
बहुत बड़ा लगता है 
खाली  ताले बंद कमरे 
खाली अरगनी 
खाली कुर्सिया 
सब बेवज़ह लगती है 
लेकिन 
आज शाम से मौसम बहुत प्यारा है 
कुछ -कुछ तो ठंडक है 
कुछ -कुछ बदराया है 
रहे -रहे लगता है
हाँ कहीं तुम हो 
नल के करीब बैठी 
कप प्लेट धो रही हो 
या बाथ रूम में कुछ गुनगुना रही हो 
या गैस पर मेरे लिए 
चाय का पानी -----
नहीं -नहीं 
तुम कही नहीं हो 
तुम हो मेरे खयालो में 
लेकिन आज शाम से मौसम बहुत प्यारा है 
और तुम नहीं हो 


                                    अशोक जौहरी 

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