Friday, October 15, 2010

जीवन की गाढ़ी

चलती है ,जीवन की गाढ़ी

कभी अगाढ़ी,कभी पिछाड़ी

मत उदास हो

चाहे आंए

जीवन में विपदाए भारी ।

ये जीवन तो खेल है साथी ,

सुख दुःख का ये मेल है साथी

दुःख का दर्द तू आज भोग ले

कल सुख का प्रभात निश्चित है ।

आज शूल के पथ पर चल तू

कल राहो पर फूल खिले गे ।

जीवन का ये मर्म समझ तू

दुःख के मोल भोग सुख को तू

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