कितनी महकी और बहकी हुई है ये शाम
आज तो पी लो ,पियो ,पीते रहो बस जाम
कल न जाने फिर कहा हो हम ,कहा हो शाम
कल न जाने फिर ये महफ़िल भी मिले न जाम
देखो तारे पी रहे है चांदनी के जाम
आज तो जी लो ,जियो ,जीते रहो ये शाम
चांदनी भीगी नहाई,ख्वाब सी ये शाम
कर रही मदहोश सबको बिन पिए ही जाम
Sunday, October 10, 2010
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