Sunday, October 10, 2010

ये शाम

कितनी महकी और बहकी हुई है ये शाम

आज तो पी लो ,पियो ,पीते रहो बस जाम


कल न जाने फिर कहा हो हम ,कहा हो शाम

कल न जाने फिर ये महफ़िल भी मिले न जाम

देखो तारे पी रहे है चांदनी के जाम

आज तो जी लो ,जियो ,जीते रहो ये शाम


चांदनी भीगी नहाई,ख्वाब सी ये शाम

कर रही मदहोश सबको बिन पिए ही जाम

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