Monday, October 11, 2010

मुस्कराना चाहता हूँ

तुमने अपने,अद्रश्य ,डरपोक हातो से

उदासीन साढ़ी के

मौन पल्लू से

पोछ दी है

मेरे चेहरे की मुस्कान!

चलो उठो

थोरा साहस करो

यह साढ़ी बदल डालो

मै मुस्कराना चाहता हूँ


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