Wednesday, July 18, 2012

pet bhooka mera ......

पेट भूका मेरा ,सर चकरा रहा
फिर भी पग यु सरक पर सरकता रहा
 , जैसे मंजिल मेरी हो निकट ही कही
और मै और मै यु ही चलता रहा
. दस दिवस हो चुके सुखी रोटी मिले
अब न जाने कहा और कब वो मिले
पास दिखता नहीं कोई होटल कही
जहा से मुझे बासी जूठन मिले
और मै जी सकू जिंदगी दो घरी
और मै सह सकू ज़ुल्म की हत्करी ...
 जिससे दिल और ये दिल तरपने लगे
और मै पाप की राह पर चल सकू
 इस लिए ही नहीं पाप सस्ता बहुत
किन्तु इसके लिए ------
पेट पलता रहे साँस चलती रहे
और मै और मै यु ही चलता रहू.

 

Wednesday, November 10, 2010

जिंदगी के माईने

जब भी हमने चाहा समझे जिंदगी के माईने
ये हमें हर दम लगी बेवजह बेमाईने

कितनी हसरत से खुदा ने आदमी पैदा किया
आदमी ने आदमी को कर दिया बेमाईने

हर धर्म ने ये कहा , इंसा करे इंसा से प्यार
पर खुदा के बन्दों ने सब कर दियाबेमाईने

रोक दो विज्ञानं की सारी प्रगति है बेफिजूल
पलक झपकते ही मिटे दुनिया, प्रगति बेमाईने

आज इंसा के कदम छूते सदी इकीसवी
आइये हम अब तो समझे जिंदगी के माईने

Sunday, October 31, 2010

एक और कदम

जल में अध् डूबे हम तुम

बाहों में बाहे लिपटी है

आँखों में मदिरा है तेरे

और गेसू में शबनम

फिर मेरे लव क्यों प्यासे है

क्यों जलता है तन मन

आओ
प्रिये इन बहकी राहो पर

लेले हम आज एक और कदम


आज बहुत दिन बाद

आज बहुत दिन बाद

तुम्हारी याद फिर आई

आज बहुत दिन बाद

हमारी आँख भर आई

कैसी है याद तुम्हारी

कैसे है मेरे आंसू

रोते-रोते भी हमको

आज हंसी आई ..


मीत

मिला तुम्हे जो मीत
न बिछुरे,
चाहे बुझ जाए हर दीप ।
गगन में
काले बादल उमर्णे
और घिर आए तम शीत ।
व्यथा में तू उलझा हो ,
होती हो हर पीर ,
किन्तु कभी जब
बिजली कढ़के ,

और समीप की प्रथ्वी उभढ़े ,
तो अपने को प् एकाकी ,
न हो तू भयभीत ,
कही पर दिखे तुम्हारा मीत ।
मिला तुम्हे जो मीत न बिचुढ़े....

Monday, October 18, 2010

नहीं बन पाते स्वैम राम कभी

सदियों से हम

दशहरे पर ,रावन बध करते है

राम के तीर चलते ही ,

पटाके छूटते है

कागज़ का विशाल पुतला

जमीन पर धरा शाई होता है

बच्चे ताली बजाते ,गुब्बारे खरीदते

खुश होते घर लोटते है

बच्चो की ख़ुशी देख बरे भी खुश होते है

लेकिन रावन नहीं मरता --

हर अगले साल--

अनेकानेक शीर्शो से

अट्टहास करती कर्कश आवाज़

मेरे कानो में परी है ...

आज हमारे जीवन ,समाज ,

और देश संसार में

राक्छासी प्रवार्तिया रस बस कर

अपने उत्कर्ष पर

मुस्कराती ख़री है

जिससे हमारे चेहरों की हवाइया उरी है

क्योकि हम सदियों से

राम जन्म तो मनाते है

लेकिन कोई राम जन्म ले सके ,

ऐसे दशरथ और कौशल्या नहीं बन पाते

राम को पूज कर भगवान् हम बनाते है

और स्वैम एक मर्यादित ,पुरुषार्थी

उत्तम इंसान नहीं बन पाते

नहीं बन पाते स्वैम राम कभी।

तू साहस कर ..--

तू साहस कर एक कदम का
आगे राहे मिल जाए गी
अपने हात बढ़ा तू आगे
आगे बाहे मिल जाए गी
एकाकी तू चल तो पथ पे
आगे साथी मिल जाए गे
जीवन गति है ,नहीं ठहरना
जीवन है कुछ करते रहना
पथ पे अपने बढ़ते रहना
जीवन में निराश मत होना
छा जाए यदि अंधकार तो
साहस से कदमो को रखना
साहस के एक -एक कदम पर
चंदा तारे बिछ जाए गे
मन में आशा दीप जले तो
नभ पे सूरज खिल जाए गे