आंधी के ये झोंके
तेज़ तूफ़ान सी
आंधी के ये झोंके
कि जिनमे कांपती शमां
जलते बुझते ,किसी तरह जिए
ज़िंदगी की हर परेशानी सहे
और उस पर
जिसकी मंज़िल मौत है
उस रास्ते पर
तेज़ कदमो से भगे
साथ ही खुद को जला दे
तन गला दे
आखरी छण तक
हज़ारो राहगीरो को
सही राहे दिखा दे
किन्तु फिर भी जब मरे
संसार ये इलज़ाम मढ़ दे
रात से सुबह तक
ढेर सारे इसने परवाने जलाये
अशोक जौहरी
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