Monday, December 2, 2013

आंधी के ये झोंके 

तेज़ तूफ़ान सी 
आंधी के ये झोंके 
कि जिनमे कांपती शमां 
जलते बुझते ,किसी तरह जिए 
ज़िंदगी की  हर परेशानी सहे 
और उस पर 
जिसकी मंज़िल  मौत है 
उस रास्ते  पर 
तेज़ कदमो से भगे 
साथ ही खुद को जला दे 
तन गला दे 
आखरी छण तक 
हज़ारो राहगीरो को 
सही राहे  दिखा दे 
किन्तु फिर भी जब मरे 
संसार ये इलज़ाम मढ़ दे 
रात से सुबह तक 
ढेर सारे  इसने परवाने जलाये 

                                  अशोक जौहरी 

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