Saturday, March 28, 2015

सोंच  में डूबा हुआ चेहरा तुम्हारा -----?
लग रहा मुझको अपरचित ,किन्तु प्यारा 
खोजता हु आज भी  मै 
वही  चिर परचित  मंद सी मुस्कान 
किन्तु हारा ----
                           अशोक जौहरी 
                9450447602 

Thursday, March 26, 2015

हवा के झोंके से
खिढ़की के पार 
गमले में लगा फूल 
हवा के झोंके से 
लहरा गया 
हवा में गंध बिखेर कर 
जैसे गीत गा गया 
मै  अकेला था घर में  
और वह दिल बहला  गया 
                   ----अशोक जौहरी 

Wednesday, March 18, 2015

प्यार की तपती धरती पर
जब भी  बादल मंडराते है 

दुनिया वाले तब उस पर
क्यों अंगारे  बरसाते  है
                     

                     जौहर 

Tuesday, March 17, 2015

हर शब्द अपनी जुबां से हमने कहा नहीं 
वह हाल कौन सा है जो तुमने सुना नहीं 
                                      जौहर 

Friday, March 13, 2015

मैं भटकता ही रहा_____
मैं भटकता ही रहा त  ज़िंदगी
प्यास मन की क्यूँ  मेरी बुझती नहीं
उम्र  रेगिस्तान सी लगने लगी है 

दूर तक छाया कोई दिखती नहीं

           ज़िंदगी के रास्ते तपती हुई चट्टान  पे 
            और ऊपर आग अम्बर  हो रहा है 
            चलते -चलते थक चूका मन 
             राह बाकी है अभी  और पॉँव रुकते ही नहीं 

                                                            जोहर 

Wednesday, March 11, 2015

क्या नज़ाकत है चाल में उनकी
कदम रुक-रुक के परतें  है
कमर बल खाने लगती है
जब वह जुल्फों को झटकते है


अपने दस्ते नाज़ुक से
यूँ साड़ी न संभाला करिये
यूँ संभलने को मेरी ज़ुल्फो के
 ख़म   तरसते   है
         
                               जौहर 

Wednesday, October 15, 2014

कश्मीर सा स्वर्ग देख कर मुँह में पानी क्यूँ लाते है 

किसी पड़ोसी की धरती पर अपने हाथ बढ़ाते  है 

जिन हाथों में कुछ शक्ति नहीं उनका अपना रक्त नहीं 

थमा हुआ है  आतंकियो से उसपे इतना गर्व दिखाते है.

                                                         अशोक जौहरी