क्या नज़ाकत है चाल में उनकी
कदम रुक-रुक के परतें है
कमर बल खाने लगती है
जब वह जुल्फों को झटकते है
अपने दस्ते नाज़ुक से
यूँ साड़ी न संभाला करिये
यूँ संभलने को मेरी ज़ुल्फो के
ख़म तरसते है
जौहर
कदम रुक-रुक के परतें है
कमर बल खाने लगती है
जब वह जुल्फों को झटकते है
अपने दस्ते नाज़ुक से
यूँ साड़ी न संभाला करिये
यूँ संभलने को मेरी ज़ुल्फो के
ख़म तरसते है
जौहर
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