कलिओं को चटखना
जीवन है अगर अपना जीना तो पढ़ेगा
रो -रो के ही हसिये मगर हसना तो पढ़ेगा
अँधेरी सूनी सी है राहें औ तूफानी हवाए
मंज़िल पे पहुचना है तो चलना तो पढ़ेगा
जब उम्र के योवन में तूफ़ान सा आए
कश्ती को किनारे कही करना तो पढ़ेगा
जब दर्द कि लहरे हो तारो सी कैसे सांसे
तब शब्द को गीतो में ढलना तो पढ़ेगा
जब रूठा हुआ यार आ के द्वार थपथपाए
मन में पढ़ी गांठो को खुलना तो पढ़ेगा
जब कलिओ को हवा प्यार कि सहलाए
तब कलिओ को चटखना तो पढ़ेगा
जीवन है अगर अपना जीना तो पढ़ेगा
रो -रो के ही हसिये मगर हसना तो पढ़ेगा
अँधेरी सूनी सी है राहें औ तूफानी हवाए
मंज़िल पे पहुचना है तो चलना तो पढ़ेगा
जब उम्र के योवन में तूफ़ान सा आए
कश्ती को किनारे कही करना तो पढ़ेगा
जब दर्द कि लहरे हो तारो सी कैसे सांसे
तब शब्द को गीतो में ढलना तो पढ़ेगा
जब रूठा हुआ यार आ के द्वार थपथपाए
मन में पढ़ी गांठो को खुलना तो पढ़ेगा
जब कलिओ को हवा प्यार कि सहलाए
तब कलिओ को चटखना तो पढ़ेगा
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