Friday, August 15, 2008

रात अंधियारी

रात अंधियारी


घने बादल घिरे है

और ऐसे में तेरी आहात लिए है

कौन जाने

किस घढ़ी

तुम आओ हम तक

बादलो का बाँध टूटे

और नभ पर चाँद फूटे !

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